नई दिल्ली: चंडीगढ़ की एक युवा आंतरिक चिकित्सा (इंटरनल मेडिसिन) की डॉक्टर ने नौकरी के पहले ही दिन एक प्रसिद्ध अस्पताल से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपने अनुभव को बेहद चौंकाने वाला बताया।
डॉक्टर ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो में आरोप लगाया कि अस्पताल प्रबंधन स्टाफ को लगभग हर मरीज को भर्ती करने के निर्देश दे रहा था। उनका कहना था कि जिन मरीजों को अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता नहीं थी, उन्हें भी भर्ती किया जा रहा था।
वीडियो में उन्होंने यह भी बताया कि अस्पताल की कमाई बढ़ाने के लिए मरीजों को आवश्यकता से अधिक समय तक आईसीयू में रखा जाता था, जिससे बिल बढ़ाया जा सके।
डॉक्टर के अनुसार, अस्पताल को केवल नाम के लिए एक फिजिशियन की जरूरत थी, जबकि मरीजों के इलाज और भर्ती से जुड़े सभी फैसले प्रबंधन द्वारा लिए जा रहे थे। उन्होंने कहा कि हर मरीज को भर्ती करने और उन्हें लंबे समय तक आईसीयू में रखने का निर्णय भी वहीं लिया जाता था।
इन परिस्थितियों से परेशान होकर डॉक्टर ने इस व्यवस्था का हिस्सा बनने से इनकार कर दिया और इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि वह किसी भी अनैतिक कार्य में अपना नाम इस्तेमाल नहीं होने देना चाहती थीं।
यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और इस मामले ने चिकित्सा क्षेत्र में नैतिकता को लेकर बहस छेड़ दी है।
